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शारदा ग्रुप का प्रतिष्ठित संस्थान हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के परिसर में इजरायली तकनीक से लैस एक पॉली हाउस का निर्माण किया गया है जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो। डॉ। अरुण छपरा ने बताया कि हमारे संस्थान आगरा-मथुरा क्षेत्र के किसानों को अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित कृषि प्रशिक्षण 200 वर्गमीटर के लिए एक पॉली हाउस का निर्माण किया गया है। की क़ीमत कीमत करीब 3 लाख रुपये है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह पॉली हाउस की स्थापना की गई है ताकि बृज क्षेत्र के किसान कम क्षेत्र में अधिक हों रोजमर्रा की सब्जियों और कसोप से अधिक के उत्पादन की जैविक खेती तकनीक द्वारा प्रशिक्षण दिया जा सकता है। पॉली हाउस निर्माण में एक होना चाहिए शुरुआती खर्चों में बढ़ोतरी करनी होगी। वर्तमान में, भारत सरकार की लागत 50 प्रतिशत है मूल्य के किसानों को अनुदान दिया जा रहा है।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख श्री प्रमोद कुमार ने बताया कि नीति मकान एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए किसानों की आय को आसानी से दोगुना किया जा सकता है यह किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए किसानों को सही प्रशिक्षण की आवश्यकता है। किसानों और उनकी नई पीढ़ियों को, आधुनिक खेती के लिए शिक्षित करना जागरूक होना और इसे ठीक से संचालित करना - इस नीति को सिखाना घर का मुख्य उद्देश्य है। हिंदुस्तान कॉलेज और सम्रद्धि क्रैप इंडिया प्रा। लिमिटेड किसानों को संयुक्त रूप से आधुनिक कृषि के लिए ब्रज क्षेत्र और उनकी आय बढ़ाने के लिए मैं लगातार कोशिश कर रहा हूं। अतीत में संस्थान द्वारा अतीत में कई कृषि उत्पादन विकास के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है। किसानों के लिए ब्रिटिश ककड़ी (ककड़ी) की बुवाई पोली हाउस को दी गई थी। पाॅली हाउस में वातावरण अथवा जलवायु नियन्त्रित कर सकते हैं। इसके उपयोग से मुख्यतः गैर-मौसमी सब्जियाँ, पुष्प फसलंे, पा ैधों की नर्सरी, पर्यानुकूलन, निर्यान्तोमुखी फलोत्पादन इत्यादि को उगाया जा सकता है। पाॅली हाउस में फसलों का उत्पादन कृत्रिम तरीके से नियन्त्रित वातावरण और अन्य स्थितियाँ जैसे तापमान, आर्द्रता, प्रकाष की तीव्रता, प्रकाषकाल, वातायन व्यवस्था, मृदा माध्यम, रोग नियन्त्रण, सिंचाई, खादपानी तथा अन्य कृषि विज्ञान विषयक कार्यसीजन, बाहरी प्राकृतिक वातावरण से अप्रभावित स्थिति में किये जाते है।

पाॅली हाउस का निर्माण 100 वर्गमीटर से प्रारम्भ कर 10000 वर्ग मीटर या और अधिक तक विस्तारित किया जा सकता है। इसप्रकार तकनीकी कृषि के माध्यम से फसलों को आकस्मिक वातावरणीय परिवर्तन जैसे तापमान में वृद्धि एवं गिरावट, वर्षा, ओलावृष्टि आदि से सुरक्षित किया जा सकता है तथा फसलों के अनुकूल तापमान को बनाये रख सकते हैं। संस्थान के निदेषक डाॅ. राजीव कुमार उपाध्याय ने बताया कि पाॅली हाउस हवा की गति 140 कि. मी. प्रति घंटा, हिमपात, ओलावृष्टि, तूफान, गर्मी एवं ठण्ड को सहन करने की क्षमता अनुसार डिजाइन किया जाता है। उन्होंने बताया कि आस-पास के किसान यहाँ प्रषिक्षण लेने के उपरांत आधुनिक तकनीकी को अपनाकर लाभान्वित हो सकते हैं। इनसे उनकी आर्थिक आय में त्वरित वृद्धि होगी तथा परिवार में खुषहाली आयेगी। इसी क्रम में उन्होंने बताया कि आगरा-मथुरा क्षेत्र के किसानों को आत्मनिर्भर बनाना तथा तकनीकी आधारित कृषि को बढ़ावा देकर सम्पन्नता लाना है।

विपिन कुमार

मीडिया प्रभारी