Vishwakarma Pooja in Mechanical Deptt.

 Vishwakarma Pooja in Mechanical Deptt.

17 सितम्बर 2019, विष्वकर्मा दिवस पर षारदा ग्रुप के प्रतिष्ठित संस्थान हिन्दुस्तान काॅलेज ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलाॅजी के यान्त्रिकी अभियान्त्रिकी विभाग द्वारा यान्त्रिकी कार्यषालाओं में विष्वकर्मा पूजा के अन्तर्गत एक भव्य एवं विषाल यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें हिन्दुस्तान काॅलेज के समस्त षिक्षकगण एवं छात्र/छात्राओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया तथा विष्वकर्मा की पूजा विधिविधान से करते हुए वेदमन्त्रोंचारण से ”इदं न मम्“ की भावना से ओतप्रोत होकर अग्निहोत्र में विषेष आहुतियाॅं दीं। पूजा अर्चना से पहले यान्त्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. पुनीत मंगला ने यज्ञ में पधारे सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए कहा कि पौराणिक काल से भगवान विष्वकर्मा को दैवीय अभियन्ता माना गया है । जिसकी पूजा में आज विभाग में एक विषाल यज्ञ का आयोजन एक विषेषज्ञ यज्ञ पुरोहित समूह द्वारा किया जा रहा है ।

जिसमें हम सब मिलकर यज्ञ पुरोहित द्वारा निर्देषित कर्मकाण्ड का पालन करते हुए कार्यषालाओं के सभी यन्त्रों एवं उपकरणों का पूजन करेगें, साथ ही भगवान विष्वकर्मा के चित्र पर माल्यार्पण करते हुए उन्हे भावभीनी श्रद्धान्जली दी । संस्थान के निदेषक डाॅ. राजीव कुमार उपाध्याय ने भगवान विष्वकर्मा को सम्पूर्ण ब्रवमाण्ड का वास्तुकार बताते हुए कहा कि ब्रवमा के निर्देषों के अनुसार उन्होंने पौराणिक काल में समस्त ब्रवमाण्ड की सुन्दर रचना की जो आज के युग के अभियन्ताओं के लिए अनुकरणीय मिसाल है। उद्घाटन कार्यक्रम के बाद यज्ञ प्रारम्भ किया गया जिसमें आहुतियों से समस्त कार्यषालायें सुगन्धित हो उठीं तथा वेद मन्त्रों के उच्चारण से पूरा काॅलेज परिसर गूॅंज उठा। यज्ञ की भव्यता दर्षनीय थी । यज्ञोपरान्त आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया । यज्ञोपरान्त छात्र/छात्राओं की जिज्ञासाओं को षान्त करने के उद्देष्य से कार्यक्रम के आयोजन एवं उपरोक्त पूजा के बारे में अनेक षिक्षकों ने अपने अपने विचार कुछ इस प्रकार व्यक्त किये विष्वकर्मा को भगवान का दर्जा प्राप्त होने का दावा करते हुए उनका पारिवारिक परिचय दिया तथा बताया इनकी माता का नाम योगसिद्धा तथा पिता का नाम प्रभास था और मात्र बहन का नाम बृहस्पति था ।

सम्पूर्ण जीवन वे निरन्तर कर्मषील रह कर कर्मसिद्धी को प्राप्त हुए ऐसा पुराणों में पाया जाता है । विष्वकर्मा को एक महान पौराणिक अभियन्ता बताते हुए कहा कि उन्होंने अनेकानेक पौराणिक हथियार भी बनाये जैसे कि ”वज्र“ जोकि महार्षि दधीच की हड्डियों का प्रयोग करके तथा अनेक सुन्दर राज्यों का भी षिल्पीकरण एवं निर्माण कराया उदाहरणार्थ भगवान कृष्ण की राजधानी द्वारिका, हस्तिनापुर, इंद्रप्रस्थ, सोने की लंका आदि । सभी भावी अभियन्ताओं को संबोधित करते हुए बताया कि विष्वकर्मा पूजा आज के दौर में भी अत्यन्त प्रासंगिक है  क्योंकि विष्वकर्मा के आदर्षों पर चल कर ही निरन्तर कर्मषील रह कर एक सफल अभियन्ता बना जा सकता है । हवन व पूजा का सम्पूर्ण प्रबंधन एवं संचालन विभागाध्यक्ष डाॅ. पुनीत मंगला, उप-विभागाध्यक्ष डाॅ. निषान्त कुमार सिंह एवं श्री दिलीप जौहरी, श्री राजवर्धन, श्री जी.पी. शर्मा और श्री धु्रवेष जादौन आदि की देखरेख में किया गया । यज्ञ के दौरान शारदा ग्रुप के कार्यकारी उपाध्याक्ष प्रो. वी.के.शर्मा, डाॅ. वी.के. गुप्ता, श्री विपिन कुमार, संस्थान के समस्त विभागाध्यक्ष एवं मेकैनिकल विभाग के समस्त षिक्षकगण एवं छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे।